बस्ती: सितंबर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि ने दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की, कि बालिग महिला का सहमति से शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं है। आरोपित को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार सोनहा थाना क्षेत्र के एक गांव के एक व्यक्ति ने गोंडा जनपद के खोड़ारे थानाक्षेत्र के रूपनगर ग्रैंड निवासी हबीब व मोनू के विरुद्ध शिकायती प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसकी 15 वर्षीय पुत्री को यह दोनों बहला फुसलाकर भगा ले गए। 3 जून 2016 को यह सूचना दर्ज कराई गई। 17 फरवरी 2017 को पीड़िता का अदालत में बयान दर्ज किया गया। पुलिस ने मोनु के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। अदालत में गवाही देने वाली आई पीड़िता ने बयान दिया कि वह मोनू व हबीब दोनों से प्यार करती थी दोनों से सम्वन्ध बनाती थी। मोनू की ओर वरिष्ठ क्रिमिनल अधिवक्ता रामकृपाल चौधरी ने अपनी दलील देते हुए अदालत में कहा कि पीड़िता घटना के समय बालिग थी। वह अपनी मर्जी से मुंबई गई थी। वहां रियाज नाम के व्यक्ति से शादी किया। कई महीने बाद वापस लौट करके घर आई दोनों पक्ष की सुनने के बाद अदालत ने माना की पीडिता ने अपने बयान में यह कहा कि उसे लखनऊ में ट्रेन में छोड़कर मोनू व हबीब चले गए थे। वह मुंबई अकेले गई। वहां अनजान व्यक्ति से शादी कर लिया। यह कहानी विश्वसनीय नहीं लगती। ट्रेन में पीड़िता के पास मौका था। कि वह पुलिस को या टीटी को अपनी बात बता सकती थी। वह तीन दिन का सफर तय करके मुंबई गई। अनजान व्यक्ति से शादी कर ली यह सब विश्वसनीय नहीं लगता। वास्तविकता है कि वह सोच समझकर मुंबई में रहने वाले रियाज से शादी किया। पीड़िता और हबीब एक ही समुदाय के हैं । वह हिंदू समुदाय के मोनू से शादी न करके हबीब से ही करना चाहती थी। हबीब की सहमति से ही मोनू से संबंध बनाया होगा। संपूर्ण पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है कि पीड़िता शारीरिक संबंध बनाने की आदी हो गई थी। एक साथ दो पुरुषों से शारीरिक संबंध बना रही थी। आरोपित मोनू के विरुद्ध कोई आरोप साबित नहीं होता है।
