बस्ती। जनपद में ग्राम पंचायत अधिकारियों एवं ग्राम विकास अधिकारियों के साथ कथित उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति, बस्ती की कार्यसमिति की बैठक 21 अप्रैल 2026 को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद कार्यालय में अध्यक्ष अरुणेश पाल की अगुवाई में सम्पन्न हुई थी, जिसमें कई अहम प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए थे।
ज्ञापन के संदर्भ में जानकारी देते हुये संघ के अध्यक्ष अरूणेश पाल ने बताया कि कर्मचारियों से विभागीय कार्यों के साथ-साथ S.IR, फार्मर रजिस्ट्री, फैमिली आईडी और ई क्रॉप सर्वे जैसे गैर-विभागीय अभियानों में लगातार कई महीनों तक काम लिया जा रहा है। यहां तक कि सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी ड्यूटी कराई जाती है, जबकि थोड़ी सी कमी पर वेतन रोकने और कारण बताओ नोटिस जैसी कार्रवाई की जा रही है।
कहा कि अभियान के दबाव में कर्मचारियों को अवकाश का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में खंड विकास अधिकारियों द्वारा अवकाश स्वीकृति में अनावश्यक देरी या रोक लगाई जा रही है, जिससे मानसिक उत्पीड़न की स्थिति बन रही है। इसे श्रम कल्याण के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए कार्य-संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव की बात कही गई।
महिला कर्मचारियों को लेकर भी चिंता जताई गई। आरोप है कि उन्हें कार्यावधि के बाद भी बैठकों में बुलाकर देर तक रोका जाता है, जिससे उनके पारिवारिक दायित्व प्रभावित हो रहे हैं और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।
जिलाधिकारी महोदया से मांग की है कि कर्मचारियों से सामान्य परिस्थितियों में केवल कार्यावधि में ही काम लिया जाए, अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और मनमानी करने वाले अधिकारियों पर रोक लगाई जाए। साथ ही महिला कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता बरतने की भी अपील की गई है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी महोदया ने हमारी मांगों को गंभीरता से सुनी और आश्वासन दिया कि आप सब लोगों के साथ न्याय किया जाएगा। इस अवसर पर संघ के संरक्षक राकेश पाण्डेय, कार्यकारी अध्यक्ष अमरनाथ गौतम ,वरिष्ठ उपाध्यक्ष जितेंद्र अरोड़ा, मंत्री सुधीर सिंह के साथ स्नेहा श्रीवास्तव, प्रिया सिंह मौजूद रही।