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बशिष्ठ पाण्डेय

बस्ती-धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रास्ते पर चलकर ही देश विकसित राष्ट्र बन सकता है।” यह विचार पूर्व लोकसभा प्रत्याशी बस्ती एवं श्री कृष्णा मिशन हॉस्पिटल के चेयरमैन बसंत चौधरी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का समग्र विकास तभी संभव है जब वह सभी धर्मों, जातियों और वर्गों को समान दृष्टि से देखे और समावेशी नीति अपनाए।

बसंत चौधरी ने कहा कि भारत की धर्मनिरपेक्ष सोच ही उसे विश्व मंच पर विशिष्ट स्थान दिलाती है। महात्मा गांधी ने जिस सेकुलर भारत की परिकल्पना की थी, वह आज वैश्विक सहयोग का आधार बन चुकी है। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू और भीमराव आंबेडकर ने एक ऐसे राष्ट्र की नींव रखी, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त हो।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत अनेक देशों से तेल, गैस और खाद जैसी आवश्यक वस्तुओं का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संतुलित और मजबूत होना अत्यंत जरूरी है।

धर्मनिरपेक्षता की नीति ही भारत को विभिन्न देशों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद करती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रहती है।

चौधरी ने यह भी कहा कि जब दुनिया के कुछ हिस्सों में राजनीतिक या सैन्य हलचल होती है, तो उसका सीधा प्रभाव भारत की आवश्यक आपूर्ति पर पड़ता है जिसका उदाहरण अमेरिका -इजरायल ईरान युद्ध में देखा जा रहा है। ऐसे समय में एक संतुलित और निष्पक्ष विदेश नीति, जो धर्मनिरपेक्ष सोच पर आधारित हो, देश को संकट से उबारने में सहायक होती है।

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को धर्मनिरपेक्ष बनाने का उद्देश्य यही था कि सभी धर्मों और समुदायों को समान अवसर और सम्मान मिले, जिससे आंतरिक एकता मजबूत हो और बाहरी संबंध सुदृढ़ बनें।

अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का वैश्विक सम्मान और अन्य देशों का झुकाव इसी बात का प्रमाण है कि धर्मनिरपेक्षता न केवल सामाजिक समरसता बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक मजबूती का भी आधार है। यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे इसी मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ना होगा।

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