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बशिष्ठ पाण्डेय

अधिकांश मौतें प्राकृतिक आपदा नहीं, प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम”

बस्ती। उत्तर प्रदेश में 13 मई को आए भीषण आंधी-तूफान, बारिश, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई है। प्रदेश के 26 जिलों में आए इस प्राकृतिक संकट में पिछले 30 घंटों के दौरान 111 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 72 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 170 पशुओं की भी जान चली गई तथा 227 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए।

इस भीषण त्रासदी पर चिंता व्यक्त करते हुए पूर्व लोकसभा प्रत्याशी बस्ती एवं श्रीकृष्णा हॉस्पिटल तथा श्री कृष्णा शुगर एंड डेयरी लिमिटेड के चेयरमैन बसंत चौधरी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मौतें निश्चित रूप से प्राकृतिक आपदा के कारण हुई हैं, लेकिन अधिकांश मौतें प्रशासन की लापरवाही और निरंकुश कार्यशैली का परिणाम हैं।

बसंत चौधरी ने कहा कि आज भी प्रदेश की सड़कों पर भारी-भरकम और सूखे पेड़ लटके हुए हैं, कई बिजली के पोल कमजोर हालत में खड़े हैं तथा शहरों और सड़कों के किनारे अनाधिकृत होर्डिंग्स लगे हुए हैं, जो तेज आंधी और तूफान के दौरान जानलेवा साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि हर वर्ष ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन तब जागता है जब सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान जा चुकी होती है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कमजोर पेड़ों की कटाई, जर्जर पोलों की मरम्मत और अवैध होर्डिंग्स को हटाने की कार्रवाई की जाए तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है। इस प्रकार की घटनाएं केवल प्राकृतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी परिणाम हैं।

बसंत चौधरी ने सुझाव देते हुए कहा कि बिजली के पोल, बड़े विज्ञापन बोर्ड और अन्य सार्वजनिक ढांचों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को एक सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्माण कार्यों के लिए “स्वेत पत्र” अथवा गुणवत्ता प्रमाणन अनिवार्य होना चाहिए ताकि उनकी मजबूती और सुरक्षा की जांच की जा सके। साथ ही माइक्रो लेबलिंग और नियमित निगरानी की व्यवस्था भी लागू की जानी चाहिए।
उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आपदाओं से निपटने के लिए पहले से मजबूत व्यवस्थाएं तैयार रहती हैं। उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण और प्रभावी प्रबंधन के कारण वहां प्राकृतिक आपदाओं में भी जनहानि कम होती है। भारत को भी ऐसी व्यवस्थाओं से सीख लेकर दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं बल्कि जनसामान्य की सुरक्षा का है। सरकार को इस विषय पर गंभीरता से कार्य करना चाहिए ताकि भविष्य में निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली की घटनाओं में जान गंवाने वाले परिवारों तथा प्रभावित लोगों को सरकार द्वारा तत्काल आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। बसंत चौधरी ने पीड़ित परिवारों की मदद को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया।

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