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प्रभु श्रीराम ने वनवास के द्वारा जगत का कल्याण किय
9 दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा
बस्ती । कैकेयी की कुबुद्धि ही राम के वनवास का कारणभूत है।  मनुष्य को उसका कर्म ही सुख या दुःख देता है। सुख दुःख का कारण जो अपने अन्दर खोजे वही सन्त है। जीव को अपने कर्म के कारण जन्म लेना पड़ता है और ईश्वर स्वेच्छा से प्रकट होते हैं। कुसंग तो हर किसी को बिगाड़ देता है। कुसंग के कारण ही कैकेयी की मति भ्रष्ट हो गयी और अपने पति दशरथ का अपमान कर कैकेयी ने श्रीराम के लिये 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। ‘‘तापस वेष बिसेषि उदासी। चौदह बरसि रामु वनवासी।।  यह सद् विचार कथा व्यास आचार्य रामेश्वर नारायण ने बहादुरपुर विकास खण्ड के नरायनपुर बढईपुरवा गांव में 9 दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के छठवे दिन व्यक्त किया।
श्रीराम वन गमन, केवट प्रसंग आदि के माध्यम से श्रीराम कथा को विस्तार देते हुये महात्मा जी ने कहा कि सभी प्रकार की अनुकूलता होते हुये यदि मन किसी विषय में न जाय वही वैराग्य है। वनवास से जीवन में सुवास आता है। प्रभु श्रीराम ने वनवास कर जगत का कल्याण किया। केवट प्रसंग का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा ‘‘ जासु नाम सुमिरत एक बारा। उतरहि नर भव सिन्धु अपारा।। ’’ केवट भाग्यशाली था कि वह प्रभु के दोनों चरणों की सेवा कर सका। वह पूर्व जन्म में क्षीर समुद में कश्यप था और नारायण की सेवा करना चाहता था किन्तु लक्ष्मी जी और शेष जी ने अनुमति नहीं दिया। आज लक्ष्मी जी सीता बनी है और शेष लक्ष्मण। गंगा पार कराने के बाद केवट ने अगूंठी लेने से बार-बार इन्कार किया तो लक्ष्मण जी उसे स्वीकारने के लिये आग्रह करने लगे, केवट ने कहा मैं और राम एक ही जाति के हैं, मैं अपने भाई से दाम कैसे लूं। मैं लोगों को गंगा पार कराता हूं राम चन्द्र जी संसार सिन्धु के केवट है।
श्रीराम महिमा का गान करते हुये महात्मा जी ने कहा कि राम तो परमानन्द स्वरूप है। जो उनका स्मरण करते हैं उन्हें दुख नहीं होता। विभिन्न प्रसंगो के क्रम में महात्मा जी ने कहा कि जीवन में कुछ नियम होने चाहिये। जिसके जीवन में कुछ शुभ संकल्प नही है वह पशु से भी अधम है। श्रीराम का वनवास में जगत के कल्याण का हेतु है। ‘‘जिनके कपट दम्भ नहीं माया। तिनके हृदय बसहु रघुराया।। महात्मा जी ने कहा कि लक्ष्मण वैराग्य है, सीता जी परा भक्ति का स्वरूप हैं, राम परमात्मा है। जब भी संकल्प करो, शुभ ही करो।
श्रीराम कथा में मुख्य यजमान रणजीत सिंह उर्फ पल्लू सिंह, लालजीत सिंह, सर्वजीत सिंह ने विधि विधान से कथा व्यास का पूजन अर्चन किया। संरक्षक आशीष सिंह, जगदीश पाण्डेय, वरिष्ठ नेता भाजपा जगदम्बा सिंह, राजकुमार शुक्ला, नागेंद्र शुक्ला, मोहंती दुबे, अजय कुमार श्रीवास्तव, वशिष्ठ पाण्डेय, रंजीत सिंह,राकेश पाण्डेय, अनिल कुमार श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, नंदलाल , मृत्युजय यादव, प्रशान्त श्रीवास्तव, अमित सिंह, अखिलेश यादव, सत्यराम निषाद, परमहंस शुक्ल, हरिनारायण पाण्डेय, ,मिथिलेश सिंह, राधिका सिंह,डाली सिंह, लक्ष्मी सिंह सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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