भक्त को भगवान के समक्ष अबोध बालक की तरह जाना चाहिये, ज्ञानी बनकर नहीं- उमाशकर जी महराज
बशिष्ठ पाण्डेय एकनिष्ठ भक्ति जागृत होने पर मिट जाती हैं भक्त और भगवान के बीच की दूरी- उमाशंकर जी महराज भक्तों में भेद नही करते सांईनाथ, इसलिये है वैश्विक विस्तार-…
