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बशिष्ठ पाण्डेय

बस्ती। जिले के बेलवाडाड़ी स्थित एक मैरेज हॉल में “बस्ती को बेस से स्पेस तक” अभियान के संस्थापक एवं समाजसेवी मनीष मिश्रा के सम्मान में समूह की बहनों द्वारा एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, महिलाएं, बच्चे और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। समारोह के दौरान शिक्षा, संस्कार और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण उस समय आया जब उपस्थित बच्चों में से एक बच्चे ने मंच से अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वह बड़ा होकर स्पेस इंजीनियर बनना चाहता है। बच्चे की यह बात सुनकर समाजसेवी मनीष मिश्रा भावुक हो उठे और उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि वास्तव में ऐसे ही सपने किसी समाज और क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देते हैं।
मनीष मिश्रा ने कहा कि आज उन्हें महसूस हो रहा है कि उनकी पहल सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “सही मायने में आज मेरा हौसला और अधिक बढ़ गया है। जब छोटे बच्चे बड़े सपने देखने लगते हैं तो यह समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत होता है। यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और संसाधन मिल जाएं तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं।”
उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में बस्ती में चारों वेदों के अध्ययन और शिक्षण के लिए विशेष संस्थानों की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान की धारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इसके माध्यम से ब्राह्मण समाज के युवा ज्ञान अर्जित कर देश और विदेश में अपनी सेवाएं देकर क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और प्राचीन ज्ञान दोनों का संतुलन समाज के विकास के लिए आवश्यक है। भारत की प्राचीन संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखते हैं और नई पीढ़ी को इनसे जोड़ना समय की आवश्यकता है।
मनीष मिश्रा ने कहा कि वह देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं से भी संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के संपर्क में हैं तथा बहुत जल्द क्षेत्र में एक नॉलेज सेंटर की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र के माध्यम से बच्चों और युवाओं को विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष से संबंधित नई जानकारियां और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उचित मंच और अवसर उपलब्ध कराने की है। यदि बच्चों को संसाधन और सही दिशा मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने आगामी रक्षाबंधन पर्व पर एक बड़े कार्यक्रम के आयोजन की घोषणा की। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि आने वाले समय में वशिष्ठ नगर “बेस से स्पेस” तक का सफर तय करेगा और यह क्षेत्र शिक्षा, विज्ञान तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।

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