गैस की किल्लत पर महिलाओं का हंगामा ● चौका-बेलन और सिलेंडर लेकर प्रदर्शन ● कालाबाजारी के खिलाफ डीएम को ज्ञापन ● छोटे कारोबार और छात्रों पर भारी संकट
बस्ती। घरेलू रसोई गैस की बढ़ती किल्लत और कालाबाजारी के खिलाफ आज शहर में जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। 309 विधानसभा क्षेत्र रुधौली की प्रत्याशी चाँदनी चौधरी, पत्नी मनोज चौधरी, के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने चौका-बेलन और गैस सिलेंडर लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। यह प्रदर्शन न केवल आम गृहणियों की परेशानियों को दर्शा रहा था, बल्कि समाज के हर वर्ग पर पड़ रहे गैस संकट के प्रभाव को भी उजागर कर रहा था।
चाँदनी चौधरी ने आरोप लगाया कि एलपीजी गैस की कालाबाजारी और वितरण व्यवस्था की खामियों ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। उन्होंने कहा कि गैस की लंबी लाइनों में घंटों खड़े रहने के बावजूद लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे घरेलू जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
उन्होंने विशेष रूप से गरीब और मजदूर वर्ग की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि जो लोग रोज कमाकर खाने वाले हैं या छात्र हैं, वे छोटे सिलेंडर या थोड़ी-थोड़ी गैस लेकर खाना बनाते थे, लेकिन अब उनके सामने भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। गैस की अनुपलब्धता के कारण कई घरों में चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।
चाँदनी चौधरी ने यह भी कहा कि गैस संकट का असर छोटे-बड़े होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट व्यवसायियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के चलते कई दुकानों को बंद करना पड़ा है, जिससे लोगों की आजीविका पर संकट गहरा गया है।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरी तरह से नाकामयाबी का परिणाम है। उनका कहना था कि जहां एक तरफ जरूरतमंद लोग गैस के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी करने वाले लोग इसका फायदा उठाकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
महिलाओं ने जिलाधिकारी से मांग की कि गैस वितरण व्यवस्था को तत्काल सुधार किया जाए, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए और जरूरतमंद लोगों को समय पर गैस उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान पूरे इलाके में माहौल काफी गरम रहा और महिलाओं का आक्रोश साफ तौर पर देखने को मिला। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बुनियादी जरूरतों की कमी जब चरम पर पहुंचती है, तो आम जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्दी कर पाता है।