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बशिष्ठ पाण्डेय

विश्व हिन्दी दिवस पर संगोष्ठी में विमर्श
बस्ती। रविवार को वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति द्वारा कलेक्टेªट परिसर स्थित शिविर कार्यालय पर विश्व हिन्दी दिवस मनाया गया। समिति के महामंत्री वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा के संयोजन में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने  विश्व हिन्दी दिवस के महत्व को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा को सम्मान देने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए हर साल विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। अक्सर लोग राष्ट्रीय हिंदी दिवस के बारे में जानते हैं, लेकिन विश्व हिंदी दिवस को लेकर अब भी कई लोगों में उत्सुकता रहती है। यह दिन खास तौर पर हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती देने का संदेश देता है। दरअसल, 10 जनवरी 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा          गांधी ने किया था। कहा कि हिन्दी अब सिर्फ साहित्य या बातचीत तक सीमित नहीं, बल्कि तकनीक, कोडिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में भी अपनी जगह बना रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि हिंदी केवल बोलने या लिखने की भाषा नहीं है, बल्कि यह वह माध्यम है जिससे देश के करोड़ों लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां हैं, लेकिन अगर सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा की बात करें, तो हिंदी सबसे आगे नजर आती है। खासकर उन देशों में, जहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, वहां हिंदी एक सांस्कृतिक सेतु की तरह काम करती है। इस साल 2026 में विश्व हिंदी दिवस की थीम है- ‘हिंदी पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’।
गोष्ठी को वरिष्ठ कवि डा. राम कृष्ण ‘जगमग’, बी.के. मिश्र, बटुक नाथ शुक्ल, रामदत्त जोशी, जगदम्बा प्रसाद ‘भावुक’ तौव्वाब अली, सुशील सिंह पथिक, पेशकार मिश्र आदि ने सम्बोधित करते हुये कहा कि विश्व हिंदी दिवस को आधिकारिक रूप से मनाने की शुरुआत साल 2006 में हुई। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसके बाद से विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे। गोष्ठी में मुख्य रूप से सामईन फारूकी, नेबूलाल, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अफजल हुसेन अफजल, गणेश प्रसाद, दीननाथ यादव आदि उपस्थित रहे।

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