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स्वतंत्र लेखन मंच की औपचारिक व विधिवत रूप से 15 अगस्त 2022 को स्थापना की गई थी यद्यपि आयोजन 12 अगस्त 2022 को ही आरंभ हो गए थे। इसी परंपरा को क़ायम रखते हुए 12 अगस्त सोमवार को 26 रचनाकारों ने वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से स्वतंत्र लेखन परिवार के संग बिताए दो वर्षों की गतिविधियां, आयोजन, साहित्यिक पारिवारिक संबंधों का आत्मीयता व भावपूर्ण गीतात्मक शैली में वर्णन किया।

13 अगस्त को *जीवन्त एकल काव्य पाठ* के महा यज्ञ जो की प्रातः 10 बजे से आरंभ होकर अनवरत रात्रि 11 बजे तक चला, पैंतीस मनीषियों ने अपनी पावन,पवित्र आहुति देकर साहित्यिक यज्ञ को सफल बनाया। मंच के संस्थापक, अध्यक्ष, सशक्त स्तंभ, कुशल नेतृत्व के परिचायक, दूरदर्शी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विनोद वर्मा दुर्गेश “मुकुंद” ने मंच पर उपस्थित होकर परिवार के सभी सदस्यों को शुभाशीष देते हुए कहा-मंच कर रहा आपका, निश दिन नित सम्मान,

आओ मिलकर हम करें, कलाधरों का गुणगान।

नहीं होता आसान क़दम से क़दम मिला कर चलना,

मंज़िलें अवश्य मिलती हैं जब भावों का भावों से होता मिलान।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा मंच को स्थापित करना जितना सहज था, उससे दुरूह था इसे गति प्रदान करना। जिस प्रकार महाभारत के युद्ध में कृष्ण के सारथी अर्जुन बने थे, उसी प्रकार मंच की अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल”देविका”ने संचालिका/ संरक्षिका/संयोजिका के रूप में इस दायित्व को बख़ूबी निभाया। अपने कोमल कांत स्वभाव से नन्हें से मंच रूपी पौधे को सींच कर विशालकाय के रूप में स्थापित कर जो प्रतिदिन अपना सौरभ यत्र तत्र सर्वत्र फैलाकर साहित्यिक वातावरण को सुवासित करने लगा और आज तक भी सुवासित कर रहा है। उन्होंने अंत में सभी को सभी शुभकामनाएं देते हुए कहा-महकता रहे ये बाग़बां यू हीं दिन और रात,

सब के आंगन होती रहे ख़ुशियों की बरसात।

तत्पश्चात डॉ दवीना अमर ठकराल “देविका” ने उपस्थित होकर सभी श्रेष्ठ अग्रज,अनुज, वरिष्ठ, कनिष्ठ कार्यकारिणी के कर्तव्यनिष्ठ, निष्ठावान, परम सहयोगी व मंच के कर्णधार सदस्यों, परिवार के अत्यंत सक्रिय, नियमित, अनुशासित, प्रतिबद्धित, संकल्पित व समर्पित साहित्य साधकों का वंदन व अभिनंदन किया। अत्यंत उल्लसित, उमंग, तरंगित व आनंदित मन से

नित नया अभ्यास, नई विधाओं में सृजन, नित नए आयोजन, मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन करने वाले प्रत्येक सक्रिय सदस्य का आभार प्रकट करते हुए कहा- एक संकल्प आपके सौजन्य से पूरा हुआ,

था देखा जो ख़्वाब उसे आकार मिला।

मुझ पर तो आप सबका जैसे कर्ज़ हुआ,

बेरंग ज़िंदगी को जैसे इन्द्रधनुषी रंग मिला।

 

हिन्द व हिंदी के उत्थान हेतु परिष्कृत व त्रुटि रहित सृजन का आवाहन करते हुए सभी कवि/कवयित्रियों को अग्रिम शुभकामनाएं निम्न पंक्तियों द्वारा दी-

कर दीजिये रोशन आज के पुनीत उत्सव को,

बिखेर दीजिए अपनी आवाज़ का जादू चारों ओर।

देकर अपनी भावाभिव्यक्ति जीवंत एकल काव्य पाठ में,

बना दीजिए *द्वितीय वार्षिकोत्सव* को महोत्सव अपने हुनर से।

 

इस आयोजन में भावाभिव्यक्ति का जादू बिखेरने वाले रचनाकार इस प्रकार हैं-एकता गुप्ता काव्या “महक”व अमिता गुप्ता नव्या “सुरभि”ने कार्यक्रम का आरम्भ अपनी मधुर स्वर में सरस्वती वंदना गाकर किया। इसके पश्चात फूलचंद्र विश्वकर्मा “भास्कर”, डॉ पूनम सिंह” सारंगी”, संजीव भटनागर “सजग”,

अशोक दोशी “दिवाकर”, नीतू रवि गर्ग” कमलिनी”, अनु तोमर “अग्रजा”

स्वर्ण लता सोन “कोकिला”, कुसुम लता” तरुषि”,अलका जैन आनंदी” चंचला” , डॉ पूर्णिमा पाण्डेय “सुधांशु” , जया त्रिपाठी मिश्रा”संवेदना”, वीना टन्डन ‘पुष्करा’, अरुण ठाकर जिंदगी “कवित्त”, डॉ मूरत सिंह यादव, दिव्या भट्ट “स्वयं”, रेखा पुरोहित तरंगिणी, सुनील भारती आज़ाद” सौरभ”, संगीता चमोली” इंदुजा”, सिद्धि डोभाल “सागरिका”, नीरजा शर्मा “अवनि”, सुमित जोशी राईटर “जोश”, कंचन वैभव वर्मा, संतोषी किमोठी वशिष्ठ, सरोज डिमरी, अनिल राही “प्रभात”, अनु भाटिया,

कृष्ण कान्त मिश्र “कमल”, सुरेश चंद्र जोशी “सहयोगी”, सुमन किमोठी “वसुधा”, विनीता नरुला” प्रसन्ना, रंजना बिनानी”स्वरागिनी” सहित कुल 31 रचनाकारों ने मंच पर अपनी लाइव प्रस्तुति दी।

सभी प्रतिभागियों ने स्वतंत्र लेखन मंच के प्रति अपने भाव, स्वदेश प्रेम से ओत प्रोत रचनाएँ व सावन मास के सौंदर्य अन्य त्योहारों व विचारणीय विषयों को अपनी रचनाओं का केंद्रबिंदु बना कर एक से बढ़ कर एक प्रस्तुति देकर आयोजन को गति प्रदान करते हुए वार्षिकोत्सव को महोत्सव का रूप दे दिया दिया।

 

डॉ अनीता राजपाल “वसुंधरा” जी ने सभी प्रतिभागी कवि/ कवयित्रियों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए आयोजन का समापन निम्न पंक्तियों से किया-

नित नई सोच जगाएँगे हम,

लेखनी को सदा सरपट चलाएगें हम,

कलम चला समाज में जागृति लाएगें हम,

आज सब मिल कर संकल्पित होते हैं हम,

स्वतंत्र लेखन मंच को बुलंदियों तक ले जाएँगें हम।

 

14 अगस्त सांय 5.30 पर आभासी कार्यशाला का संचालन डॉ दवीना अमर ठकराल “देविका” द्वारा किया गया। स्वतंत्र लेखन मंच के सक्रिय व समर्पित सभी रचनाकार अपने व्यस्त समय में से समय निकाल कर आरंभ से अंत तक आभासी कार्यशाला में बने रहे। लगभग चार घंटे तक चली इस आभासी कार्यशाला में अपने खट्टे मीठे अनुभवों, संस्मरणों, अनुभवों व मंच/ परिवार द्वारा मिली सीखों, निर्देशों को साँझा करते हुए हँसते व हँसाते रहे।

 

उपस्थित सभी साहित्यकारों का आभार प्रकट करते हुए आभासी कार्यशाला का समापन निम्न पंक्तियों द्वारा हुआ-

सद्भाव, करुणा, समन्वयता का हो समावेश,

धैर्य, सहनशीलता का हो हम सब में प्रवेश।

संवाद हो निर्विवाद परिष्कृत व निःस्वार्थ,

संभव हो पाएगा तभी आशान्वित विकास।

 

15 अगस्त-स्वतंत्रता दिवस अत्यंत हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। मंच पर लगभग 60 देशभक्त रचनाकारों द्वारा देश प्रेम से ओत प्रोत रचनाएँ मंच पर प्रेषित कर देश भक्ति की बयार चला दी।

 

16 अगस्त -आज़ादी के वास्तविक मायने विषय पर 25 विवेकी रचनाकारों ने अपनी भावाभिव्यक्ति देकर गहन विचार करने पर विवश किया। 16 अगस्त स्वैच्छिक विषय पर रचनाकारों की रचनाएँ मंच पर प्रेषित हुई। सभी समर्पित साहित्य साधकों की उल्लेखनीय सहभागिता को रेखांकित करते हुए *स्वतंत्र सहयोगी सम्मान* व सज़ा देश भक्त सम्मान से सम्मानित कर उनके स्वर्णिम साहित्यिक भविष्य की कामना की। पूर्व कार्यकारणी का दिल से आभार प्रकट करते हुए नव निर्वाचित कार्यकारणी को बधाई व शुभकामनाएं दी गयी।

 

पुनर्गठित नई कार्यकारिणी इस प्रकार है-

डॉ अनीता राजपाल “वसुंधरा”- *सह अध्यक्षा*

सुरेश चंद्र जोशी “सहयोगी”- *उपाध्यक्ष*

नीरजा शर्मा “अवनि”- *उपाध्यक्षा*

अशोक दोशी “दिवाकर”- *कार्यकारी अध्यक्ष*

संजीव कुमार भटनागर “सजग” – *सह कार्यकारी अध्यक्ष*

सुनील भारती आज़ाद “सौरभ”- *प्रमुख अभिकल्पक प्रभारी*

नीतू रवि गर्ग” कमलिनी”- *सह अभिकल्पक प्रभारी*

सुमित जोशी राइटर “जोश”- *सह अभिकल्पक प्रभारी*

कृष्ण कान्त मिश्र “कमल”- *प्रमुख मीडिया प्रभारी*

संजीव कुमार भटनागर “सजग”- *सह मीडिया प्रभारी*

दिव्या भट्ट “स्वयं”- *प्रमुख दैनिक आयोजन प्रभारी*

सुमन किमोठी”वसुधा”- *सह दैनिक आयोजन प्रभारी*

 

*संपादन समिति*-

सुरेश चंद्र जोशी,सुनील, संजीव भटनागर, कृष्ण कान्त,जया, दिव्या भट्ट।

 

आयोजन को समापन की ओर ले जाते हुए अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल “देविका” ने परिवार के सभी सदस्यों का आभार प्रकट करते हुए व शुभाशीष देते हुए कहा-

हृदय में ज्ञान हो, चित में ध्यान हो।

दुख सब दूर हों, अभय वरदान हो।

आशाएँ सम्पूर्ण हों, कुटुम्ब में प्रीत हो।

मान सम्मान हो, जग में जीत हो।

सुख समृद्धि हो, काया निरोगी हो।

शांति हो जीवन में, भक्ति और शक्ति हो।

 

अंत में मंच की अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल देविका ने स्वतंत्र लेखन परिवार के सभी सदस्यों की ओर से कहा-समर्पित है हर भाव, हर क्षण, हर साँस मंच की उत्तरोत्तर उन्नति, उत्थान व प्रगति के लिए।

इसी के साथ चार दिवसीय कार्यक्रम की सफलतापूर्वक समापन हुआ।

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