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बशिष्ठ पाण्डेय
बस्ती। प्रसिद्ध समाजसेवी, वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार  डा. वी.के. वर्मा को उनके साहित्यिक योगदान के लिये शव्द सुमन साहित्यिक संस्थान द्वारा ‘पूर्वान्चल रत्न’  सम्मान से सम्मानित किया गया।
डा. वी.के. वर्मा के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुये  वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि ‘मानवता के स्वर, काव्य मुखी, युग चित्र, भावानुभूति, काव्य सौरभ, ‘भाव मन्थन’ काव्य संग्रह एवं लघु कथा संग्रह ‘सोच, कहानी संग्रह उत्कर्ष एवं ‘कोविड 19 काव्य संग्रह’ जैसी  कृतियों की रचना सहज कार्य नहीं है. डॉ. वर्मा ने चिकित्सक और साहित्यकार दोनों सन्दर्भो में स्वयं को सिद्ध किया है। साहित्य जगत को उनसे बहुत संभावनायें हैं।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि वे जिन स्थितियों को अनूभूत करते हैं उसे काव्य में ढालने की कोशिश करते हैं. अति शीघ्र तथागत गौतम बुद्ध पर उनका महाकाव्य पाठकों  के समक्ष होगा। कहा कि सम्मान से और बेहतर दायित्वों के निर्वहन की रचनात्मक ऊर्जा मिलती है।
डा. वर्मा को सम्मानित किये जाने पर बी.एन. शुक्ल, डॉ. अजीत श्रीवास्तव ‘राज’ डा. अफजल हुसेन ‘अफजल’, अर्चना श्रीवास्तव, सुशील सिंह, त्रिभुवन प्रसाद मिश्र, श्याम प्रकाश शर्मा, डा. नवीन श्रीवास्तव, डा. रामजी सोनी, विनोद उपाध्याय, डा. आर.एन. चौधरी, डा. आर.जी. सिंह, दीपक सिंह प्रेमी, जगदम्बा प्रसाद ‘भावुक’, सागर गोरखपुरी के साथ ही अनेक साहित्यकारों, चिकित्सकों, समाजसेवियों ने प्रसन्नता व्यक्त किया है।

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